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Author : | Munavar Rana |
Total Pages : | 349 |
Total Size : | 1.22 MB |
File Tags : | Shayari |
Category : | Literature |
Published : | 3 years ago |
Downloadable : | View Only |
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संकलन एवं संपादन : सचिन चौधरी
मुनव्वर राना जिन का पूरा नाम सैयद मुनव्वर अली राणा है इन्होंने ग़ज़ल को हिंदुस्तानी तहजीब में बहुत ही ऊंची शिखर पर पहुंचाया है इनका जन्म 26 नवंबर 1952 को रायबरेली उत्तर प्रदेश में हुआ और आजकल वेल लखनऊ में रहते हैं। इन्हें 6 फरवरी 2014 को उत्तर प्रदेश सरकार ने उर्दू अकादमी का अध्यक्ष नियुक्त किया।
फरिश्ते आकर उनके जिस्म पर खुशबू लगाते हैं,
वह बच्चे रेल के डिब्बों में जो झाड़ू लगाते हैं।
मेरी ख्वाहिश है कि मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊं,
मां से इस तरह लिपट जाऊं कि बच्चा हो जाऊं ।
लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती,
बस एक मां है जो मुझसे खफा नहीं होती।